सोने से पहले यह जरुर सुने - An Overview




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एक वैयाकरण नाव में सवार था। वह घमंड में भरकर मल्लाह से कहने लगा, "क्या तुमने व्याकरण पढ़ा है?"

उसने पूछा, "तुम अभी तो मुझप वार करना चाहते थे और अब तुरन्त ही तलवार फेंककर मुझे छोड़ दिया। इसका क्या कारण है!

... एक नवोदय कौआ है, हमारे पंख से सजा हुआ, की अपने खिलाडी के रूप में लिपटे बाघ के हृदय ले साथ, वह भी लम्बी चौडी बातचीत करके आपके सर्वोत्तम रूप से एक रिक्त पद्य बाहर लाने में सक्षम है: और सिर्फ़ एक जोहन्नेस का नौकर होना ही, उसके अभिमान में देश को हिलाने वाला अकेला दृश्य है.[२५]

अमूल्य शेक्सपियर प्रकृति का मुफ्त उपहार था; पूरी तरह से चुपचाप दिया गया - कुल मिलाकर चुपचाप प्राप्त है, जैसे कि यह छोटी खाते में एक चीज़.

स्त्री ने जब देखा कि उसका पति नाराज हो गया है तो झट रोने लगी। फिर गिड़गिड़ाकर कहने लगी, "मैं सिर्फ पत्नी ही नहीं बल्कि पांव की धूल हूं। मैंने तुम्हें ऐसा नहीं समझा था, बल्कि मुझे तो तुमसे और ही आशा थी। मेरे शरीर के तुम्हीं मालिक हो और तुम्हीं मेरे शासक हो। यदि मैंने धैर्य और सन्तोष को छोड़ा तो यह अपने लिए नहीं, बल्कि तुम्हारे लिए। तुम मेरी सब मुसीबतों और बीमारियों की दवा करते हो, इसलिए मैं तुम्हारी दुर्दशा को नहीं देख सकती। तुम्हारे शरीर की सौगन्ध, यह शिकायत अपने लिए नहीं, बल्कि यह सब रोना-धोना तुम्हारे लिए है। तुम मुझे छोड़ने का जिक्र करते हो, यह ठीक नहीं हैं।"

[इस तरह के शिक्षा ग्रहण करने के योग्य चिह्न सब मनुष्यों की दशा में विद्यमान हैं, परन्तु वे सांसारिक मोह में फंसे रहने के कारण इनपर ध्यान नहीं देते। यह हृदय, जिसमें ईश्वरीय ज्योति का प्रकाश नहीं पहुंचता, नास्तिक की आत्मा की तरह अन्धकारमय है। ऐसे हृदय से तो कब्र ही अच्छी है।]

तोते ने तुरन्त साधु पर कटाक्ष किया और कहा कि ओ गंजे, शायद तूने भी तेल की बोतल गिरायी है, तो तुझे गंजा होना पड़ा।

इन सेवों में से जितने खाये जायें, उतने तू खा। कमी मत करना।"

यह सुनकर हरएक ने आनी-अपनी खूबियां बतलायीं। एक बोला, "मैं कुत्तो की बोली पहचानता हूं। वे जो कुछ कहें, उसे मैं अच्छी तरह समझ लेता हूं। हमारे काम में कुत्तों से बड़ी अड़चन पड़ती है। हम यदि बोली जान more info लें तो हमारा ख़तरा कम हो सकता है और मैं इस काम को बड़ी अच्छी तरह कर सकता हूं।"

साधु बोला, "मैं इस विपत्ति का कारण जानता हूं और मुझे अपने पापों का ज्ञान है। मैंने बेईमानी से अपना मान घटाया और मेरी ही प्रतिज्ञा ने मुझे इसकी कचहरी में धकेल दिया। मैंने जान-बूझकर प्रतिज्ञा भंग की। इसलिए इसकी सजा में हाथ पर आफत आयी। हमारा हाथ हमारा पांव, हमारा शरीर तथा प्राण मित्र की आज्ञा पर निछावर हो जाये तो बड़े सौभाग्य की बात है। तुझसे कोई शिकायत नहीं, क्योंकि तुझे इसका पता नहीं था।"

[मित्र के कारण मिले हुए कष्टों और मुसीबतों पर खुश होना मित्रता की चिह्न है। मित्र का उदाहरण सोने के समान है और उसके लिए परीक्षा अग्नि के तुल्य है। शुद्ध सोना अग्नि में पड़कर निर्मल और निर्दोष होता है।] १

गृहस्वामी ने यह आवाज सुनी तो उसे डर लगने लगा। सोचने लगा, शायद दूसरे चोर ने किसी को मार डाला है या हो सकता है, वह मुझपर भी पीछे से टूट पड़। हो सकता है कि बाल-बच्चों पर भी हाथ साफ करे। तो फिर इस चोर के पकड़ने से क्या लाभ होगा?

बादशाह ने कहा, "अपने साथी की प्रशंसा में अति न कर और दूसरे की प्रशंसा के सहारे अपनी प्रशंसा न कर, क्योंकि यदि परीक्षा के लिए इसे मैं तेरे सामने बुलाऊं तो तुझको लज्जित होना पड़ेगा।"

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